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मेरा राष्ट्र सो रहा है

रे शोर ना मचा यहाँ
कि मेरा राष्ट्र सो रहा है ।।

अनभिज्ञ सठिसाई जवानी से
विमुख बीती भव्य कहानी से ।
वर्तमान से भी हो अनजान
सो रहा है यह चादर तान ।।

गंगा में बह गया हरिद्वार
कोशी-संतप्त हुआ बिहार ।
सुनामी में बहा दक्षिण प्रदेश
भूकंप से भी जागा ना देश ।

विपदा-नियंत्रण को रखकर ताक
शासक कर रहा हवाई झाँक ।
नहीं पता किसी को क्या हो रहा है
कि अभी मेरा राष्ट्र सो रहा है ।।

Huthridurga

The rains were round the corner and since long we had not been to our sojourns. We had postponed the trips for last couple of months due to expected new arrival in my family and as soon as he was at home and started settling down, I thought of venturing out once again.

चलो पहाड़ बुला रहा है

चलो पहाड़ बुला रहा है।

यहाँ पग प्रयाण को तत्पर
वहाँ खड़ा वो दुर्गम भूधर
चुनौती दे क्या चिढ़ा रहा है?
चलो पहाड़ बुला रहा है।

छोटे-लंबे कदम बढाकर
पादप-पाहन पे धूल उडाकर
पहुँचना जहाँ वो श्रृंग खड़ा है
देखें हम हैं या तुंग बड़ा है

उत्थान-अवसान की राहें लेते
कभी चट्टान को गलबाहे दैतै

बस एक बात ही सुनते जाना
चलो पहाड़ बुला रहा है।

Happiness once more

Today, as the Indian Cricket team was writing history by defeating Australia in third test in a row, some changes were happening in my life too. Something very pleasant.

नज़र

विहगम, विहसते व्योन पे
चमकते चाँद के चरण-तल
तिल की तरह का तारा
कि
कहा नभ ने, लगा काजल की कोर
हनु पे स्मितप्रभ शिशु को,
"हाय! नज़र ना लगे किसी की नेरे शशि को!"

Makalidurga

Two hectic months went by and no trekking could be planned. The last one anyway had gone flat. So we planned once again.

A plan went flat

It was after a break of 3 weeks that we got together to scale another height - only to find that half of the team was not available. But the enthusiasts persisted and we went ahead with our planning. Couple of guys chose to sleep with their phones switched off and the number plummeted even further.