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नज़र

विहगम, विहसते व्योन पे
चमकते चाँद के चरण-तल
तिल की तरह का तारा
कि
कहा नभ ने, लगा काजल की कोर
हनु पे स्मितप्रभ शिशु को,
"हाय! नज़र ना लगे किसी की नेरे शशि को!"

Parliament is Supreme??????

Last six months the phrase has made rounds on the media more than any other. every political person went incessantly about beseeching supremacy of parliament and proving it otherwise in their actions. The most, the government. Anyone even remotely connected by the government, at the drop of his hat went into rhetoric of using the phrase.

हनु

उन आँखों से छलकती चमक
उस चेहरे पे फेली हुई दमक

खुले बिखरे घुंघराले वो बाल
दर्शाते मस्ती में बीते तीन साल

इतराते, बल खाते, ठुमकते पग
ज्यों मौज दौड रही हो रग-रग

वो स्नेहयुक्त उन्मुक्त आलिंगन
वो प्रेमसिक्त मीठा-सा चुंबन

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